CJP: इंटरनेट मीडिया पर ट्रेंड कर रहा कॉकरोच जनता पार्टी, कुछ ही दिनों में करोड़ों लोग जुड़े CJI सूर्यकांत के कॉकरोच वाले बयान के विरोध में बनी ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के सोशल मीडिया पर 6 दिन में करोड़ों फॉलोअर हो गए हैं।

Table of Contents
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक डिजिटल आंदोलन शुरू हुआ, जिसने मीम्स, व्यंग्य और राजनीतिक नाराजगी को मिलाकर इंटरनेट मीडिया पर तेजी से पकड़ बना ली है।
चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के बयान के विरोध में शुरू हुई कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का एक्स अकाउंट बंद कर दिया गया है
क्या है कॉकरोच जनता पार्टी CJP
CJP: कॉकरोच जनता पार्टी एक ऑनलाइन राजनीतिक व्यंग्य (सटायर) समूह है, जिसे आम लोगों, खासकर युवाओं की नाराजगी और सिस्टम से निराशा को आवाज देने के लिए बनाया गया बताया जा रहा है। इसका टैगलाइन है- वॉयस आफ लेजी एंड अनएप्लाइड यानी आलसी और बेरोजगारों की आवाज।कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम से एक डिजिटल आंदोलन शुरू हुआ, जिसने मीम्स, व्यंग्य और राजनीतिक नाराजगी को मिलाकर इंटरनेट मीडिया पर तेजी से पकड़ बना ली है।कॉकरोच जनता पार्टी’ के सोशल मीडिया पर 6 दिन में करोड़ों फॉलोअर हो गए हैं।
पार्टी की सदस्यता के लिए 4 योग्यताएं
- पहली- बेरोजगारी।
- दूसरी- आलसी होना यानी डले रहो, पड़े रहो।
- तीसरी- ऑनलाइन रहने की लत।
- चौथी- प्रोफेशनली भड़ास निकालने की क्षमता।
किसने शुरू किया अभियान
CJP: अभिजीत दिपके कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके एक पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट हैं। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की है। इसके बाद वह 2020 से 2023 तक अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी (AAP) की सोशल मीडिया और चुनाव प्रचार टीम का हिस्सा रहे। फिलहाल अभिजीत अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में अपनी मास्टर डिग्री पूरी कर चुके हैं और नौकरी की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि, अपनी निजी जिंदगी और आर्थिक मजबूती पर ध्यान देने के लिए उन्होंने आम आदमी पार्टी छोड़ी थी।
CJI सूर्यकांत के कॉकरोच वाले बयान
CJP: इंटरनेट मीडिया पर ट्रेंड कर रहा कॉकरोच जनता पार्टी, कुछ ही दिनों में करोड़ों लोग जुड़े कॉकरोच की तरह बहुत से युवा ऐसे हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। वे सोशल मीडिया और RTI एक्टिविज्म बन रहे हैं। हजारों लोग ऐसे हैं जो काले चोगे पहनकर घूम रहे हैं, लेकिन उनकी डिग्रियों पर गंभीर संदेह है।
CJI सूर्यकांत ने कॅाकरोच वाले बयान पर सफाई दी:कहा- इसे गलत तरीके से पेश किया गया, मैंने फर्जी डिग्रीधारियों की आलोचना की थी
मेरी टिप्पणी खास तौर पर उन लोगों के लिए थी, जो फर्जी और नकली डिग्रियों के सहारे वकालत जैसे पेशों में आ गए हैं। मीडिया, सोशल मीडिया और दूसरे सम्मानित पेशों में भी ऐसे लोग घुस आए हैं। वे परजीवियों जैसे हैं।