झारखंड में है प्रसिद्ध सिद्धपीठ: रजरप्पा मंदिर (छिन्मस्तिका मंदिर):Rajrappa temple ramgarh


झारखंड के रामगढ़ जिले में स्थित यह मंदिर प्रसिद्ध और जाने-माने तीर्थ स्थलों में से एक है, जो छिन्नमस्तिका की सिरविहीन प्रतिमा के लिए जाना जाता है। यह मंदिर दामोदर नदी और भैरा (भैरवी) नदी पर स्थित यह पवित्र स्थल एक महत्वपूर्ण शक्ति पीठ भी माना जाता है।

ऐसे पड़ा छिन्नमस्तिका का नाम : History of temple rajrappa

कहा जाता है कि एक बार भवानी अपनी दो सहेलियों के साथ मंदाकिनी नदी में स्नान करने आई थीं। स्नान करने के बाद सहेलियों को इतनी तेज भूख लगी कि उनका रंग काला पड़ने लगा। उन्होंने भोजन मांगा। भवानी ने थोड़ा सब्र करने के लिए कहा, लेकिन वे भूख से तड़पने लगीं। तब भवानी ने खड्ग से अपना सिर काट दिया, कटा हुआ सिर उनके बाएं हाथ में आ गिरा और खून की तीन धाराएं बह निकलीं। सिर से निकली दो धाराओं को उन्होंने उन दाेनों की ओर बहा दिया। बाकी को खुद पीने लगीं। तभी से भवानी के इस रूप को छिन्नमस्तिका के नाम से जाना गया।

रजरप्पा मंदिर (छिन्मस्तिका मंदिर) की विशेषताएं :-

RAJRAPPA TEMPLE

यह मंदिर माता छिन्नमस्तिका जिन्हें लोग छिन्नमस्ता के नाम से भी जानते

हैं जो माता दुर्गा के उग्र रूप को दर्शाता है और कमल के बिस्तर पर कामदेव और रति के शरीरों पर खड़ी है।
ऐसा माना जाता है कि जब भगवान शंकर जब माता सती का जला हुआ अंग लेकर जा रहे थे तब यहां पर देवी सती का दाहिना कंधा गिरा हुआ था। इसलिए भी यह स्थान काफी महत्वपूर्ण हो जाता है।

Location of rajrappa Temple: कैसे पहुंचे इस मंदिर तक

यह स्थान झारखंड की राजधानी रांची से लगभग 80 से 90 किलोमीटर की दूरी पर रामगढ़ जिले में स्थित है जहां पर आप बाइक, कार, कैब कार, ओटो, बस इत्यादि से भी बड़ी आसानी से जा सकते हैं
यहां की सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन रामगढ़ कैंट रेलवे स्टेशन सबसे नजदीक में है जिसका लगभग दूरी 25-26 किलोमीटर है
और सबसे निकटतम हवाई अड्डा बिरसा मुंडा हवाई अड्डा है जो कि रांची में है जहां की दूरी लगभग 80 कम है।
यहां लाखों की संख्या में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के साथ खास कर झारखंड बिहार-बंगाल और लगभग पूरे भारत के तीर्थ यात्री अगर झारखंड आते हैं तो यहां एक बार दर्शन करने जरूर आते हैं।

यहां प्रवेश निःशुल्क होता है

इस मंदिर में माता का दर्शन बहुत ही आसानी से हो जाते हैं क्योंकि यहां प्रवेश निःशुल्क होता है लेकिन व्यस्त समय में अधिकांश यहां आपको लंबी लाइनें देखने को मिलती है।
यहां पर सप्ताह के दोपहर के समय में थोड़ा कम भीड़ होता जिससे दर्शन और भी आसानी से हो जाता है
मान्यता है कि यहां अगर कोई भी श्रद्धालु अगर सच्चे मन से जो भी मनोकामना मांगते हैं तो उनकी सारी मनोकामनाएं पूर्ण होती है। यह मंदिर तांत्रिक साधना के लिए भी बहुत प्रसिद्ध है।
ये मंदिर प्रकृति की गोद में चारों तरफ जंगल, पहाड़, नदियों के संगम इस जगह और भी मनमोहक और सुंदर बनाता है।

भक्तों की मन्नत पूरी करती है मां

रामगढ़ में स्थित करीब 6000 साल पुराना मां छिन्नमस्तिका का मंदिर काफी रहस्यमय है. इस मंदिर में स्थापित देवी की प्रतिमा काफी अनोखी है. इस प्रतिमा में मां का सिर कटा हुआ है और उनके गले से रक्त की तीन धाराएं निकल रही हैं. देवी का कटा सिर उनके ही हाथ में मौजूद है. माता के इस अद्भुत स्वरूप के दर्शन करने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं. इसके अलावा यह मंदिर तंत्र साधना के लिए भी काफी प्रसिद्ध है. इसे लेकर मान्यता है कि इस मंदिर में आकर माता के दर्शन करने मात्र से लोगों की मन्नत पूरी हो जाती है.

इस मंदिर परिसर में मुख्य मंदिर के अलावा और भी मंदिर है, जिसमें भगवान शिव का मंदिर, सूर्य भगवान का मंदिर, काली माता का मंदिर और भी कुल मिलकर लगभग 10 से 15 हिंदू देवी देवताओं के मंदिर यहां पर स्थित हैं।

इस पवन पवित्र स्थान पर मकर संक्रांति के समय बहुत विशाल मेला लगता है जिसमें लाखों की संख्या में लोग यहां आते हैं
यहां पे लोग स्नान, पूजा, विवाह, मुंडन संस्कार भी करवाते हैं।
विशेषकर यह मंदिर उन मंदिर में से एक है जहां पशु बलि (बकरी) की परम्परा भी है

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