Kauleshwari Mata Mandir Chatra: यहां होती है माता कौलेश्वरी और भगवान शंकर की पूजाl

Kauleshwari Mata Mandir Chatra: यहां होती है माता कौलेश्वरी और भगवान शंकर की पूजा, जानिए और भी महत्व और तथ्य

प्रकृति और रोमांच के सही मिश्रण के बीच झारखंड के चतरा जिला में स्थित कौलेश्वरी धाम आध्यात्मिक विकास का स्थान है। यह बस्ती से लगभग 33 किलोमीटर दूर है।
श्रद्धा के साथ प्रवेश करना और आशीर्वाद लेकर जाना, यह पवित्र स्थान भक्तों को आंतरिक शांति प्रदान करता है

Jharkhand Tourism Kauleshwari Temple History: कौलेश्वरी-पहाड़-एवं-मंदिर

महाभारत काल के समय में ऐसा बताया जाता है कि यहां पांडवों ने आ कर भगवान शंकर की पूजा अर्चना की थी। झारखंड के चतरा जिला में स्थित यह प्राचीन माता कौलेश्वरी और भगवान शंकर जी का यह प्राचीन मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है यहां पर भगवान और माता के प्रति श्रद्धा आपको सालों भर देखने को मिलेगा। यहां पर प्रकृति के बीचों बीच में समाई यह का दृश्य बहुत ही मनमोहक और असीम शांति का अनुभव करता है यह मंदिर बस्ती से दूर पहाड़ी पर है लेकिन मंदिर के आस-पास में पूजा की सारी सामग्रियां मिल जाती है और जल भी मिल जाता है यही कारण है कि यहां पर श्रद्धालु खाली हाथ आते हैं
पहाड़ी पर स्थित एक सरोवर (तालाब) भी है जिसमें भक्त स्नान कर के भगवान शंकर का पूजा करते हैं

Kauleshwari Temple: क्या है सच्चाई..?

पौराणिक कथाओं के अनुसार ऐसा बताया गया है कि महाभारत के समय जब पांडवों का अज्ञातवाश हुआ था तब यहां आए थे और पहली बार उन्होंने ने यहां पर भगवान शंकर की पूजा-अर्चना की थी यह मंदिर लगभग 2000 फीट के आस-पास ऊंची पहाड़ी पर स्थित है जहां पर अगर आप जाते हैं तो आज भी आपको असीम शांति का अनुभव प्राप्त कर पाएंगे इतनी उच्चाइयों पर होने के कारण अगल-बगल के नजारे पहाड़, जंगल, चट्टाने, बादलों से घिरा हुआ दृश्य बहुत ही सुन्दर और मन को मोह लेने वाला दिखेगा। यहां पर सावन में बहुत श्रद्धालु जल चढ़ाने आते हैं

शक्ति पीठ के नाम से भी जाना जाता है, झारखण्ड प्रदेश का यह मंदिर।

बिहार, झारखंड, बंगाल, उड़ीसा, छत्तीसगढ़ व अन्य राज्यों से भी यहां पर लाखों भक्तों का जन शैलाब निकलता है अधिकांश चुंकि यह बिहार से सटा हुआ है तो ज्यादा तर लोग यहां से आते है और सच्ची श्रद्धा और निष्ठा से पूजा करते हैं और सारी मनोकामनाएं पूरी तरह से पूर्ण भी होती हैं। लगभग हरेक दिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु यह अपनी अर्जी (मनोकामना) को लेकर आते हैं और नवरात्रि के समय में तो यही भीड़ लाखों में पहुंच जाती है। यह भीड़ बढ़ने का खास कारण यह भी होता है कि यह मंदिर पहाड़ों से चारों ओर घिरा हुआ है जिससे अगल-बगल का नजारा भी देखने लायक होता है जो अलग पहचान देता है। और यहां ऐसा भी माना जाता है कि यहां पर बौद्ध और जैन संतो ने यहां पर आ कर तपस्या की थी जिनका अवशेष आज भी इन क्षेत्रों में देखने को मिलता है। इस तरह इस धाम को अलग धर्म में एकता और समन्वय स्थापित करने में एक अलग बनाता है।

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